25 Feb

Pradhan Mantri Awas Yojana

”प्रधान मंत्री आवास योजना ”का लाभ बहुत सारे परिवारों को मिला है और मिल रहा है लेकिन सबसे बड़ी विडंबना यह है की जिसे इस योजना की सबसे अधिक आवश्यकता है- यानी गांव में रहने वाले पिछड़े, भूमिहीन परिवार, जिनके पास खुद की कोई भी ज़मीन नहीं है, वो इस योजना के लाभ से बिलकुल वंचित हैं |

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वैशाली जिले के राजापाकर प्रखंड के गाओं में काम करने के दौरान हमलोग बहुत सारे ऐसे भूमिहीन परिवारों से मिले हैं, जिनके पास अपनी जमीन नहीं है और उनके कथनानुसार उन्हें किसी सरकार योजना के माध्यम से भूमि या आवास के लिए कोई आर्थिक सहयोग नहीं मिला है। उनका यह भी कहना है की वो किसी और की जमीन में झोपडीनुमा घर में रहते हैं जिसके कारण उन्हें जमीन मालिक के लिए बहुत की कम पैसों में मज़दूरी करनी पड़ती है | वर्षो से ऐसे भूमिहीन परिवार इस तरह की प्रताड़ना झेल रहे हैं और कई लोग तो बंधुआ मजदूर की तरह जीवन – यापन कर रहे हैं |

प्रधान मंत्री आवास योजना के अंतर्गत भूमिहीन परिवारों को भी भूमि देकर अथवा भूमि के लिए आर्थिक मदद देकर फिर मकान के लिए आर्थिक सहयोग और ठीक इसके लिए ही बिहार राज्य में एक अलग योजना भी है जिसका नाम है ”मुख्यमंत्री वास स्थल क्रय सहायता योजना”| लेकिन ऐसा मालूम पड़ता है की इस योजना का जमीनी क्रियान्वयन बिलकुल शुन्य है | अतः इस सिलसिले में हमने राजापाकर प्रखंड के प्रखंड विकास पदाधिकारी से भी बात की और 115 ऐसे भूमिहीन परिवारों की सूचि भी उन्हें दी है | उन्होंने यह आश्वासन दिया है की सूचि में सम्मलित सभी भूमिहीन परिवारों की उचित जांच कर उन्हें वास भूमि या आर्थिक मदद दी जाएगी ।

हमे उम्मीद है की उचित कार्यवाही जल्द ही होगी किन्तु कटु सत्य तो यह है की ये समस्या सिर्फ एक प्रखंड की नहीं है, यह तो पूरे जिले, पूरे राज्य और शायद पूरे देश की समस्या है और पता नहीं उस स्तर पर कार्यवाही कब होगी!

23 Dec

JSSK: कागज़ और ज़मीन का फर्क एवं RTI: कागज़ और कलम की ताकत

हमारे पिछले पिछले पोस्ट (Date-17th September) में आपने पढ़ा की मिथलेश राय जी की पत्नी के दो बच्चो का प्रसव प्राथमिक स्वास्थय केंद्र, राजपकार में हुआ था और उन्हे जननी शिशु सुरक्षा कार्यकर्म (JSSK)के तहत मिलने वाली राशि को प्राप्त करने के लिए लोक शिकायत निवारण अधिनियम का सहारा लेना पड़ा था |

इसके बाद जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के अपूर्ण भुगतान के विषय में अधिक जानकारी के लिए हमने कई आशा कार्यकर्ता और आशा फैसिलिटेटर से फोन पर बात-चीत करके वास्तविकता जानने की कोशिश की | उन्होने बताया की उनलोग ने कई बार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र , राजापाकर में प्रसव-महिला के बैंक खाता संख्या और अन्य दस्तावेज जमा किए हैं फिर भी वर्ष 2016 ,17,18 के भी कई ऐसे cases हैं जिनका भुगतान नहीं हुआ है। इस सम्बन्ध में फिर हमने 25 /05 /2019 को राज्य स्वास्थ्य समिति, पटना में एक RTI आवेदन किया|इस सन्दर्भ में मिले जवाब से हमे पता चला की प्राथमिक स्वाथ्य केंद्र, राजापाकर में वर्ष 2016 – 2018 में 1500 से भी अधिक महिलाये है जो इस योजना के तहत मिलने वाली राशि से अभी तक वंचित है।

तदोपरांत इस सम्बन्ध में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, राजापाकर के सम्बंधित कर्मचारी से हमने 3-4 बार मुलाकात की लेकिन वहाँ से कोई संतोषजनक समाधान नहीं मिला। फिर हमने इस सम्बन्ध में जिला स्वास्थ्य समिति, वैशाली में meetings की और सिविल सर्जन, वैशाली को भी सूचि के साथ लिखित आवेदन दिया | इसके बाद लगातार हमने फोन पर जिला स्वास्थ्य समिति और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से भुगतान करने के लिए follow up किया लेकिन हमे हर बार मात्र आश्वासन मिला, समाधान नहीं । अंततः इसके लिए हमने राज्य स्वास्थ्य समिति, पटना का चक्कर लगाना शुरू किया।वहाँ 4-5 बार मीटिंग और सूचि के साथ लिखित रूप से आवेदन देने के बाद उन्होंने हमे आश्वासन दिया की जल्द से जल्द भुगतान कर दिया जायेगा। कुल मिलाकर तीन महीनों के applications, meetings, follow ups के क्रम के बाद अभी की जानकारी के मुताबिक (प्राथमिक स्वास्थय केंद्र, राजापाकर के रिपोर्ट के अनुसार) 1231 वंचिंत महिलाओं को जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम की राशि भुगतान कर दिया गया है | हमारा प्रयास अभी भी जारी है और उम्मीद है बची हुई महिलाओं को भी जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के तहत मिलने वाली राशि जल्द ही मिल जाएगी |

वैशाली जिले में कई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ,सदर अस्पताल ,अनुमंडलीय अस्पताल और रेफरल अस्तपताल है जहा संस्थागत रूप से प्रसव कराया जाता है ,इस लेख से आप भली भांति अनुमान लगा सकते है की वहाँ कैसी स्थिति होगी।

सोचने वाली बात यह है की एक सरकारी योजना के अंतर्गत छोटी सी राशि पाने के लिए हमारी धात्री महिलाओं को इतना लम्बा इन्तजार करना पड़ता है लेकिन क्या ये मुद्दे हमारे राजनैतिक, सामाजिक, आर्थिक विकास के चर्चाओं से अभी कोसों दूर हैं?

16 Dec

नागरिक का सूचना-अधिकार (RTI) बनाम दायित्व हस्तांतरण की सरकारी प्रथा

पिछले 5 वर्षो में प्रभावकारी ढंग से अपना  कार्य  करने में हमे RTI कानून का काफी  सहयोग मिला है, किन्तु इसका उपयोग करने में प्रायः कई समस्याओ का भी सामना  करना पड़ा है। इस पोस्ट के माध्यम से ऐसी ही एक समस्या हम आपके समक्ष रखने जा रहे हैं।

किसी सरकारी विभाग के उच्च स्तरीय इकाई से सूचना माँगने पर प्रायः उसे निचली इकाइयों को हस्तांतरित कर दिया जाता है | जैसे राज्य स्तरीय इकाई से सूचना आवेदन करने पर वो जिला स्तरीय इकाइयों को भेजते हैं और वो उसे आगे प्रखंड स्तरीय इकाइयों को भेजते हैं | इस कारण कई तरह की दिक्कते आती हैं – पूरी सूचना मिलने में अत्यधिक विलम्ब होता है, कई बार सभी जगह से सूचना आती भी नहीं है, मिली हुई सूचना को संकलित कर किसी सही निष्कर्ष पर पहुँचने में बहुत परेशानी होती है क्योंकि अलग अलग इकाइयों से अलग अलग फॉर्मेट में अलग अलग समय सूचना दी जाती है |

 इसी तरह हमने  RTI आवेदन राज्य स्तरीय इकाई को  26 /08 /2019 को बिहार राज्य स्वास्थय समिति, पटना में  किया था जो  (जननी शिशु सुरक्षा कार्यकर्म )  से सम्बंधित था । जिसका आवेदन की  छाया प्रति इस पोस्ट के साथ सल्गन  है इसमें आप देख सकते है की हमलोगो   द्वारा मांगी गई सूचना राज्य स्वास्थ्य समिति पटना  से है। लेकिन मेरे इस आवेदन को  राज्य स्तरीय इकाई से  जिला स्तरीय इकाइयों को  हस्तातरण कर  दिया गया। जिला स्तरीय इकाइयों से  प्रखंड स्तरीय इकाइयों  को  भेज दिया गया।  

ऐसी परिस्थिति में कुछ सवाल उठते हैं, जैसे:-
1.  जब उच्च स्तरीय इकाइयों के पास ऐसी सूचना होती ही नहीं तो सरकारी विभागों में नीचे से लेकर ऊपर तक काम सुचारू ढंग से हो रहा है या नहीं यह नियत्रण कैसे स्थापित होता है ?
2. अगर राज्य स्तरीय इकाई के पास सूचना होती है तो अपने स्तर पर वो लोगो को सूचना उपलब्ध क्यों नहीं कराते है ? क्या RTI कानून को कमजोर करने का ये एक संस्थागत प्रयास है ?


17 Sep

Janani Shishu Suraksha Yojana

जननी शिशु योजना वर्ष 2005 में शुरू की गयी थी | इस योजना को 1 जून 2011 को जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम का नाम दिया गया | इस योजना का उद्देष्य बच्चों की मृत्यु दर घटाना है | इस कार्यक्रम के अंतर्गत निःशुल्क जांच, निःशुल्क वाहन की सुविधा के साथ साथ संस्थागत प्रसव होने पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामूहिक स्वास्थ्य केंद्र एवं सदर अस्पतालों में सहयोग राशि के रूप में ग्रामीण छेत्र में 1400 रूपए एवं शहरी छेत्र में 1000 रूपए देने का प्रावधान है |

हमारे सिटीजन केयर कॉल सेंटर में कॉल आया जो राजापाकर ब्लॉक के भलुई पंचायत के मिथलेश राय की थी | उनका कहना था की उनकी पत्नी का दो बार प्रसव संस्थागत रूप से दिनांक 27 /10 /2016  एवं 02 / 09 /2019 को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र राजापाकर में हुआ था | लेकिन जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के तहत मिलने वाली राशि के भुगतान उन्हें अभी तक नहीं मिला था | राशि के भुगतान हेतु उन्होंने अपने दस्तावेज कई बार जमा कर चुके थे | इस सम्बन्ध में वो सम्बंधित सरकारी कर्मचारी से भी मिल चुके थे लेकिन वो अपशब्दों से अपमानित कर भगा दिए जाते थे |

इस जानकारी के बाद हमने लोक शिकायत निवारण अधिनियम के तहत दिनांक 28 /05 /2019 को शिकायत दर्ज की | इस शिकायत की अनन्य संख्या 999990128051967188 है | इस शिकायत की 4 सुनवाई हुई जिसमे मिथलेश राय जी ने अनुमंडलिय लोक शिकायत निवारण कार्यालय महुआ वैशाली में उपस्थित होकर सपना पक्ष रखा  लेकिन इस योजना से सम्बंधित कर्मचारी अनुपस्थित रहे | इसकी अंतिम सुनवाई 29 /08 /2019  को हुई जिसमे मिथलेश राय तो उपस्थित हुए परन्तु योजना सम्बंधित कर्मचारी फिर नहीं आये | अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी द्वारा प्राथमिक स्वास्थय केंद्र राजापाकर के कर्मचारी से फोन पर बातचीत की गई जिसमे प्राथमिक स्वस्थ्य केंद्र राजापाकर के कर्मचारी ने बतया की मधुमाला कुमारी का जननी शिशु सुरक्षा कार्यकर्म का प्रोत्साहन राशि 27/08 /2019 को भेज दिया गया है।

हमारे समाज की विडम्बना यह है की एक छोटी सी राशि के लिए भी लोगो को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है | अभी भी हमारे जिले में बहुत सारी महिलाएं हैं जिन्हें जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम की प्रोत्साहन राशि से वंचित रखा जा रहा है | हमारा संघर्ष जारी है | उम्मीद करते हैं की जल्द ही इस योजना से वंचित महिलाओ को लाभ दिलाने में सफल होंगे |

इस विषय में अगर आपलोग अपने कुछ सुझाव देना चाहते हैं तो कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें  |

22 Jun

Kabir Antyeshti Yojana III

हमारे सिटीजन केयर कॉल सेंटर में 13 मार्च, 2019 एक को कॉल आया था | कॉल पर वैशाली जिला के राजापाकर प्रखंड के बखरी बरई पंचायत की निवासी सविता कुमारी जी का कहना था की उनकी माँ श्रीमती उर्मिला देवी की मृत्यु 20 फरवरी, 2019 को हुई और उनके दाह संस्कार के लिए भी पैसे न होने के कारण उन्हें गांव में किसी से उधार लेना पड़ा | ऐसे ही परिस्थिति में तत्काल सहायता देने के लिए बनी कबीर अन्त्येष्टि अनुदान योजना की सहयोग राशि उन्हें उस समय तो नहीं ही मिली, पिछले 3 महीने से अलग अलग कर्मचारियों के चक्कर काटने के बाद भी उनका परिवार इससे वंचित है | इनकी इस स्थिति से सम्बन्धित फेसबुक पेज पर पहला पोस्ट 10 मई को और दुसरा पोस्ट 24 मई को डाला गया था।

इस कॉल के बाद हमने पंचायत स्तर पर इस वंचित परिवार को सहायता दिलाने की कोशिश की किन्तु नाकाम रहे| अंततः 2 मई को हमने बिहार लोक शिकायत अधिनियम के तहत इस सम्बन्ध में एक लोक शिकायत दर्ज की (अनन्य संख्या 999990102051965148 है)।जिसकी पहली सुनवाई 23 मई को हुई जिसमे परिवादी सबिता कुमारी ने महुआ अनुमंडल लोक शिकायत कार्यालय पहुंचकर अपना पक्ष रखा लेकिन इस योजना से सम्बंधित कोई कर्मचारी उपस्थित नहीं हुए। लोक शिकायत पदाधिकारी ने इस शिकायत निवारण की अगली तारीख 6 जून, 2019 को तय की थी लेकिन उसकी सुनवाई 13 जून को हुई परिवादी सबिता कुमारी ने इस दिन भी महुआ अनुमंडल लोक शिकायत कार्यालय पहुंचकर अपना पक्ष रखा लेकिन 13 जून को भी इस योजना से सम्बंधित कोई कर्मचारी उपस्थित नहीं हुए और इस योजना से सम्बंधित कर्मचारी के तरफ से पत्र का कोई जवाब नहीं मिलने की बात कही गई और अगली सुनवाई 27 जून 2019 को तय की गई।

सविता जी दोनों पैरों से दिव्यांग हैं फिर भी इस योजना का लाभ लेने के लिए लगातार संघर्ष कर रही हैं, उम्मीद है अगली सुनवाई के बाद इन्हे और दौड़ना नहीं पड़े।