17 Sep

Janani Shishu Suraksha Yojana

जननी शिशु योजना वर्ष 2005 में शुरू की गयी थी | इस योजना को 1 जून 2011 को जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम का नाम दिया गया | इस योजना का उद्देष्य बच्चों की मृत्यु दर घटाना है | इस कार्यक्रम के अंतर्गत निःशुल्क जांच, निःशुल्क वाहन की सुविधा के साथ साथ संस्थागत प्रसव होने पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामूहिक स्वास्थ्य केंद्र एवं सदर अस्पतालों में सहयोग राशि के रूप में ग्रामीण छेत्र में 1400 रूपए एवं शहरी छेत्र में 1000 रूपए देने का प्रावधान है |

हमारे सिटीजन केयर कॉल सेंटर में कॉल आया जो राजापाकर ब्लॉक के भलुई पंचायत के मिथलेश राय की थी | उनका कहना था की उनकी पत्नी का दो बार प्रसव संस्थागत रूप से दिनांक 27 /10 /2016  एवं 02 / 09 /2019 को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र राजापाकर में हुआ था | लेकिन जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के तहत मिलने वाली राशि के भुगतान उन्हें अभी तक नहीं मिला था | राशि के भुगतान हेतु उन्होंने अपने दस्तावेज कई बार जमा कर चुके थे | इस सम्बन्ध में वो सम्बंधित सरकारी कर्मचारी से भी मिल चुके थे लेकिन वो अपशब्दों से अपमानित कर भगा दिए जाते थे |

इस जानकारी के बाद हमने लोक शिकायत निवारण अधिनियम के तहत दिनांक 28 /05 /2019 को शिकायत दर्ज की | इस शिकायत की अनन्य संख्या 999990128051967188 है | इस शिकायत की 4 सुनवाई हुई जिसमे मिथलेश राय जी ने अनुमंडलिय लोक शिकायत निवारण कार्यालय महुआ वैशाली में उपस्थित होकर सपना पक्ष रखा  लेकिन इस योजना से सम्बंधित कर्मचारी अनुपस्थित रहे | इसकी अंतिम सुनवाई 29 /08 /2019  को हुई जिसमे मिथलेश राय तो उपस्थित हुए परन्तु योजना सम्बंधित कर्मचारी फिर नहीं आये | अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी द्वारा प्राथमिक स्वास्थय केंद्र राजापाकर के कर्मचारी से फोन पर बातचीत की गई जिसमे प्राथमिक स्वस्थ्य केंद्र राजापाकर के कर्मचारी ने बतया की मधुमाला कुमारी का जननी शिशु सुरक्षा कार्यकर्म का प्रोत्साहन राशि 27/08 /2019 को भेज दिया गया है।

हमारे समाज की विडम्बना यह है की एक छोटी सी राशि के लिए भी लोगो को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है | अभी भी हमारे जिले में बहुत सारी महिलाएं हैं जिन्हें जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम की प्रोत्साहन राशि से वंचित रखा जा रहा है | हमारा संघर्ष जारी है | उम्मीद करते हैं की जल्द ही इस योजना से वंचित महिलाओ को लाभ दिलाने में सफल होंगे |

इस विषय में अगर आपलोग अपने कुछ सुझाव देना चाहते हैं तो कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें  |

22 Jun

Kabir Antyeshti Yojana III

हमारे सिटीजन केयर कॉल सेंटर में 13 मार्च, 2019 एक को कॉल आया था | कॉल पर वैशाली जिला के राजापाकर प्रखंड के बखरी बरई पंचायत की निवासी सविता कुमारी जी का कहना था की उनकी माँ श्रीमती उर्मिला देवी की मृत्यु 20 फरवरी, 2019 को हुई और उनके दाह संस्कार के लिए भी पैसे न होने के कारण उन्हें गांव में किसी से उधार लेना पड़ा | ऐसे ही परिस्थिति में तत्काल सहायता देने के लिए बनी कबीर अन्त्येष्टि अनुदान योजना की सहयोग राशि उन्हें उस समय तो नहीं ही मिली, पिछले 3 महीने से अलग अलग कर्मचारियों के चक्कर काटने के बाद भी उनका परिवार इससे वंचित है | इनकी इस स्थिति से सम्बन्धित फेसबुक पेज पर पहला पोस्ट 10 मई को और दुसरा पोस्ट 24 मई को डाला गया था।

इस कॉल के बाद हमने पंचायत स्तर पर इस वंचित परिवार को सहायता दिलाने की कोशिश की किन्तु नाकाम रहे| अंततः 2 मई को हमने बिहार लोक शिकायत अधिनियम के तहत इस सम्बन्ध में एक लोक शिकायत दर्ज की (अनन्य संख्या 999990102051965148 है)।जिसकी पहली सुनवाई 23 मई को हुई जिसमे परिवादी सबिता कुमारी ने महुआ अनुमंडल लोक शिकायत कार्यालय पहुंचकर अपना पक्ष रखा लेकिन इस योजना से सम्बंधित कोई कर्मचारी उपस्थित नहीं हुए। लोक शिकायत पदाधिकारी ने इस शिकायत निवारण की अगली तारीख 6 जून, 2019 को तय की थी लेकिन उसकी सुनवाई 13 जून को हुई परिवादी सबिता कुमारी ने इस दिन भी महुआ अनुमंडल लोक शिकायत कार्यालय पहुंचकर अपना पक्ष रखा लेकिन 13 जून को भी इस योजना से सम्बंधित कोई कर्मचारी उपस्थित नहीं हुए और इस योजना से सम्बंधित कर्मचारी के तरफ से पत्र का कोई जवाब नहीं मिलने की बात कही गई और अगली सुनवाई 27 जून 2019 को तय की गई।

सविता जी दोनों पैरों से दिव्यांग हैं फिर भी इस योजना का लाभ लेने के लिए लगातार संघर्ष कर रही हैं, उम्मीद है अगली सुनवाई के बाद इन्हे और दौड़ना नहीं पड़े।

24 May

Kabir Antyeshti Yojana II

हमारे सिटीजन केयर कॉल सेंटर में 13 मार्च, 2019 एक को कॉल आया था | कॉल पर वैशाली जिला के राजापाकर प्रखंड के बखरी बरई पंचायत की निवासी सविता कुमारी जी का कहना था की उनकी माँ श्रीमती उर्मिला देवी की मृत्यु 20 फरवरी, 2019 को हुई और उनके दाह संस्कार के लिए भी पैसे न होने के कारण उन्हें गांव में किसी से उधार लेना पड़ा | ऐसे ही परिस्थिति में तत्काल सहायता देने के लिए बनी कबीर अन्त्येष्टि अनुदान योजना की सहयोग राशि उन्हें उस समय तो नहीं ही मिली, पिछले 3 महीने से अलग अलग कर्मचारियों के चक्कर काटने के बाद भी उनका परिवार इससे वंचित है | इनकी इस स्थिति से सम्बन्धित एक पोस्ट हमारी फेसबुक पेज पर भी 10 मई को डाला गया था।

इस कॉल के बाद हमने पंचायत के स्तर पर इस वंचित परिवार को सहायता दिलाने की कोशिश की किन्तु नाकाम रहे| अंततः 2 मई को हमने बिहार लोक शिकायत अधिनियम के तहत इस सम्बन्ध में एक लोक शिकायत दर्ज की (अनन्य संख्या 999990102051965148 है)।जिसकी पहली सुनवाई कल 23 मई को हुई जिसमे परिवादी सबिता कुमारी ने महुआ अनुमंडल लोक शिकायत कार्यालय पहुंचकर अपना पक्ष रखा लेकिन इस योजना से सम्बंधित कोई कर्मचारी उपलब्ध नहीं हुए। लोक शिकायत पदाधिकारी ने इस शिकायत निवारण की अगली तारीख 6 जून, 2019 को तय करते हुए इस योजना से सम्बंधित कर्मचारी को लेटर भेजने की बात कही है।

सविता जी दोनों पैरों से दिव्यांग हैं, उम्मीद है उन्हें ये सहयोग राशि लेने के लिए और दौड़ना, भटकना नहीं होगा |

10 May

Kabir Antyeshti Yojana I

कबीर अंत्येष्टि योजना 2007-08 से लागु है। इस योजना के तहत बी ० पी ० एल० परिवार के किसी भी उम्र के सदस्य की मृत्यु की स्थिति में अंत्येष्टि क्रिया कर्म के लिये वर्तमान में तीन हजार रूपये ( 3000 ) प्रदान करती है। हर पंचायत में किसी भी समय 7 मृतकों के लिए राशि उपलब्ध होती है। लेकिन हमारे समाज का दुर्भाग्य यह है की मृत शरीर के अंतिम संस्कार के लिए भी लोगो को इस योजना का सहयोग लेने के लिए ब्लॉक और मुखिया जी के चक्कर लगाने पड़ते हैं । फिर भी सही समय पर सहयोग नहीं मिल पता है। 
हमारे संसथान के माध्यम से चल रहे सिटीजन केयर कॉल सेंटर में 13-03-2019 को कॉल आया | यह कॉल वैशाली जिले के राजापाकर ब्लॉक के बखरी बरई पंचायत के निवासी अमोद सहनी की थी | उनका कहना था की उनकी माँ (उर्मिला देवी ) की मृत्यु 20-02-2019को हुई थी लेकिन अभी तक इनको कबीर अंत्येष्टि अनुदान योजना के तहत मिलने वाली राशि 3000 तीन हजार नहीं मिली थी । 
हमारे कार्यकर्त्ता ने उनके घर जा कर उनके परिवार वालों से मिले और देखा की मृतक के परिवार का घर कच्ची मिट्टी के दिवार से बना हुआ था | घर में अमोद सहनी की पत्नी जो एक आंख से दिव्यांग है और उनकी एक बहन सबिता कुमारी रहती हैं | सबिता कुमारी दोनों पैरो से दिव्यांग है | इनके अलावा घर में चार (४) छोटे -छोटे बच्चे रहते हैं | अमोद सहनी ईंट भठ्ठा पर मजदूरी करके अपने परिवार का पालन पोषण करते है। 
हमारे कार्यकर्त्ता ने मृतक के परिवार वालों से बातचित की | अमोद सहनी और उनकी बहन सबिता कुमारी ने बताया की पैसो के अभाव के कारण उनकी माँ का मृत शरीर पूरे दिन घर पर रखा रहा | पंचायत के मुखिया को सुचना भी दी गयी लेकिन नजदीकी मुखिया या ब्लॉक के कोई कर्मचारी नहीं आये। अंत में उन्होंने कुछ समान बंधक रखकर पैसों का उपाए करके अपनी माँ का अंतिम संस्कार किया ।
ऐसे ही बहुत असहाय परिवार है जो इस योजना से वंचित है।इस योजना से संबंधित कर्मचारी एवं पंचायतों के प्रतिनिधि से नम्र निवेदन है की ऐसे असहाय परिवार को इस योजना का लाभ दिलाने में मदद करे।