23 Dec

JSSK: कागज़ और ज़मीन का फर्क एवं RTI: कागज़ और कलम की ताकत

हमारे पिछले पिछले पोस्ट (Date-17th September) में आपने पढ़ा की मिथलेश राय जी की पत्नी के दो बच्चो का प्रसव प्राथमिक स्वास्थय केंद्र, राजपकार में हुआ था और उन्हे जननी शिशु सुरक्षा कार्यकर्म (JSSK)के तहत मिलने वाली राशि को प्राप्त करने के लिए लोक शिकायत निवारण अधिनियम का सहारा लेना पड़ा था |

इसके बाद जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के अपूर्ण भुगतान के विषय में अधिक जानकारी के लिए हमने कई आशा कार्यकर्ता और आशा फैसिलिटेटर से फोन पर बात-चीत करके वास्तविकता जानने की कोशिश की | उन्होने बताया की उनलोग ने कई बार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र , राजापाकर में प्रसव-महिला के बैंक खाता संख्या और अन्य दस्तावेज जमा किए हैं फिर भी वर्ष 2016 ,17,18 के भी कई ऐसे cases हैं जिनका भुगतान नहीं हुआ है। इस सम्बन्ध में फिर हमने 25 /05 /2019 को राज्य स्वास्थ्य समिति, पटना में एक RTI आवेदन किया|इस सन्दर्भ में मिले जवाब से हमे पता चला की प्राथमिक स्वाथ्य केंद्र, राजापाकर में वर्ष 2016 – 2018 में 1500 से भी अधिक महिलाये है जो इस योजना के तहत मिलने वाली राशि से अभी तक वंचित है।

तदोपरांत इस सम्बन्ध में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, राजापाकर के सम्बंधित कर्मचारी से हमने 3-4 बार मुलाकात की लेकिन वहाँ से कोई संतोषजनक समाधान नहीं मिला। फिर हमने इस सम्बन्ध में जिला स्वास्थ्य समिति, वैशाली में meetings की और सिविल सर्जन, वैशाली को भी सूचि के साथ लिखित आवेदन दिया | इसके बाद लगातार हमने फोन पर जिला स्वास्थ्य समिति और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से भुगतान करने के लिए follow up किया लेकिन हमे हर बार मात्र आश्वासन मिला, समाधान नहीं । अंततः इसके लिए हमने राज्य स्वास्थ्य समिति, पटना का चक्कर लगाना शुरू किया।वहाँ 4-5 बार मीटिंग और सूचि के साथ लिखित रूप से आवेदन देने के बाद उन्होंने हमे आश्वासन दिया की जल्द से जल्द भुगतान कर दिया जायेगा। कुल मिलाकर तीन महीनों के applications, meetings, follow ups के क्रम के बाद अभी की जानकारी के मुताबिक (प्राथमिक स्वास्थय केंद्र, राजापाकर के रिपोर्ट के अनुसार) 1231 वंचिंत महिलाओं को जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम की राशि भुगतान कर दिया गया है | हमारा प्रयास अभी भी जारी है और उम्मीद है बची हुई महिलाओं को भी जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के तहत मिलने वाली राशि जल्द ही मिल जाएगी |

वैशाली जिले में कई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ,सदर अस्पताल ,अनुमंडलीय अस्पताल और रेफरल अस्तपताल है जहा संस्थागत रूप से प्रसव कराया जाता है ,इस लेख से आप भली भांति अनुमान लगा सकते है की वहाँ कैसी स्थिति होगी।

सोचने वाली बात यह है की एक सरकारी योजना के अंतर्गत छोटी सी राशि पाने के लिए हमारी धात्री महिलाओं को इतना लम्बा इन्तजार करना पड़ता है लेकिन क्या ये मुद्दे हमारे राजनैतिक, सामाजिक, आर्थिक विकास के चर्चाओं से अभी कोसों दूर हैं?

Nishant Ojha
Author: Nishant Ojha