16 Dec

नागरिक का सूचना-अधिकार (RTI) बनाम दायित्व हस्तांतरण की सरकारी प्रथा

पिछले 5 वर्षो में प्रभावकारी ढंग से अपना  कार्य  करने में हमे RTI कानून का काफी  सहयोग मिला है, किन्तु इसका उपयोग करने में प्रायः कई समस्याओ का भी सामना  करना पड़ा है। इस पोस्ट के माध्यम से ऐसी ही एक समस्या हम आपके समक्ष रखने जा रहे हैं।

किसी सरकारी विभाग के उच्च स्तरीय इकाई से सूचना माँगने पर प्रायः उसे निचली इकाइयों को हस्तांतरित कर दिया जाता है | जैसे राज्य स्तरीय इकाई से सूचना आवेदन करने पर वो जिला स्तरीय इकाइयों को भेजते हैं और वो उसे आगे प्रखंड स्तरीय इकाइयों को भेजते हैं | इस कारण कई तरह की दिक्कते आती हैं – पूरी सूचना मिलने में अत्यधिक विलम्ब होता है, कई बार सभी जगह से सूचना आती भी नहीं है, मिली हुई सूचना को संकलित कर किसी सही निष्कर्ष पर पहुँचने में बहुत परेशानी होती है क्योंकि अलग अलग इकाइयों से अलग अलग फॉर्मेट में अलग अलग समय सूचना दी जाती है |

 इसी तरह हमने  RTI आवेदन राज्य स्तरीय इकाई को  26 /08 /2019 को बिहार राज्य स्वास्थय समिति, पटना में  किया था जो  (जननी शिशु सुरक्षा कार्यकर्म )  से सम्बंधित था । जिसका आवेदन की  छाया प्रति इस पोस्ट के साथ सल्गन  है इसमें आप देख सकते है की हमलोगो   द्वारा मांगी गई सूचना राज्य स्वास्थ्य समिति पटना  से है। लेकिन मेरे इस आवेदन को  राज्य स्तरीय इकाई से  जिला स्तरीय इकाइयों को  हस्तातरण कर  दिया गया। जिला स्तरीय इकाइयों से  प्रखंड स्तरीय इकाइयों  को  भेज दिया गया।  

ऐसी परिस्थिति में कुछ सवाल उठते हैं, जैसे:-
1.  जब उच्च स्तरीय इकाइयों के पास ऐसी सूचना होती ही नहीं तो सरकारी विभागों में नीचे से लेकर ऊपर तक काम सुचारू ढंग से हो रहा है या नहीं यह नियत्रण कैसे स्थापित होता है ?
2. अगर राज्य स्तरीय इकाई के पास सूचना होती है तो अपने स्तर पर वो लोगो को सूचना उपलब्ध क्यों नहीं कराते है ? क्या RTI कानून को कमजोर करने का ये एक संस्थागत प्रयास है ?

Nishant Ojha
Author: Nishant Ojha